THE SELFISH MOTHER IN HINDI

 **कहानी १: स्वार्थी विरासत**


एक छोटे गांव में जो की लहलहाती पहाड़ियों और हरे-भरे जंगलों से घिरा था, वहां माया नाम की एक महिला रहती थी। वह अपनी धन-संपत्ति और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थी। जल्दी ही विधवा हो गई, और उसने अपने मरे हुए पति से बड़ी धन-संपत्ति विरासत में पाई। लेकिन माया की संपत्ति ने उसकी स्वार्थी प्रवृत्ति को और भी गहरा किया। वह अक्सर दूसरों की मदद नहीं करती थी और हमेशा अपनी सुख-साम्रथ्य की चिंता करती थी।


माया की एक बेटी थी जिसका नाम अनन्या था, जो एक दयालु आत्मा थी और उम्मीद करती थी कि एक दिन माया बदल जाएगी। अनन्या ने खुद देखा कि उसकी मां गांव के लोगों की समस्याओं को अनदेखा करती थी, और उन्हें कभी भी सहायता नहीं करती थी, चाहे वो कितनी भी कठिनाई में हों।


एक बार, गांव में बड़ा तूफान आया, जिससे घरों और फसलों में बड़ा नुकसान हुआ। गांव के लोग, जो पहले से ही गरीबी की समस्या से जूझ रहे थे, अब और भी ज्यादा भयभीत हो गए थे। अनन्या ने अपनी मां से अनुरोध किया कि वे अपनी खाद्य सामग्री और राजाई गांव के लोगों के साथ साझा करें।


"हमें अपने संसाधन को क्यों साझा करना चाहिए?" माया ने ठंडे लहजे में कहा। "वे इसे नहीं कमाये हैं, हमने किया है।"


अनन्या अपनी मां की इस ठंडी प्रतिक्रिया से बहुत दुखी हुई। उसने फैसला किया कि वह खामोशी से बैठ नहीं सकती। रात के अंधेरे में, जब उसकी मां सो रही थी, अनन्या ने गुप्त रूप से अपनी खाद्य सामग्री और राजाई इकट्ठा की और उसे गांव के निर्धन लोगों के बीच बांट दिया। गांव के लोगों ने अनन्या की इस दयालुता को देखकर उन्हें बहुत पसंद किया और उन्होंने उसे धन्यवाद दिया।


सुबह होते ही, माया ने देखा कि उनकी संपत्ति में से काफी सारा सामान गायब हो गया था। उसने अनन्या से इसका कारण पूछा। अनन्या ने ईमानदारी से सब कुछ बता दिया, उम्मीद करते हुए कि उसकी मां उसकी भावनाओं को समझेंगी। लेकिन माया बहुत नाराज हुई। "तुमने हमारी संपत्ति क्यों बांटी? ये सब हमारे लिए है, दूसरों के लिए नहीं," उसने गुस्से में कहा।


अनन्या का दिल टूट गया। उसने महसूस किया कि उसकी मां कभी नहीं बदलेगी। उसने गांव छोड़ने का फैसला किया और एक नई जिंदगी की तलाश में निकल पड़ी, जहां उसकी दयालुता और उदारता की सराहना की जाएगी। लोग उसकी प्रशंसा करते और उसे अपने दिलों में बसा लेते।


इसी बीच, माया बूढ़ी और अकेली हो गई। उसकी संपत्ति अब उसे कोई खुशी नहीं दे रही थी, और गांव वालों ने भी उससे द

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